नर्मदा साहित्य मंथन का पंचम सोपान: झाबुआ की युवा शक्ति ने बिखेरी राष्ट्रबोध की आभा

Fifth Step of Narmada Sahitya Manthan: Youth power of Jhabua spread the aura of national consciousness.

झाबुआ/इंदौर । संस्कृति, राष्ट्रबोध और युवा ऊर्जा के अद्भुत समागम के साथ 'नर्मदा साहित्य मंथन' का पांचवां वर्ष सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। तीन दिवसीय इस बौद्धिक कुंभ ने न केवल वैचारिक चेतना को जागृत किया, बल्कि इंदौर की धरा पर देश भर के विद्वानों और युवाओं के बीच एक सेतु का कार्य भी किया। इस वर्ष के आयोजन की सबसे गौरवशाली उपलब्धि झाबुआ जिले से बड़ी संख्या में युवाओं और मातृशक्ति की सक्रिय भागीदारी रही, जिन्होंने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया। 

Jhabua News Samachar- Fifth Step of Narmada Sahitya Manthan: Youth power of Jhabua spread the aura of national consciousness.- नर्मदा साहित्य मंथन का पंचम सोपान: झाबुआ की युवा शक्ति ने बिखेरी राष्ट्रबोध की आभा


केरल के राज्यपाल का प्रेरक उद्बोधन

महोत्सव का शुभारंभ अत्यंत भव्य रहा। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केरल के माननीय राज्यपाल ने 'भारत का स्वबोध' विषय पर अत्यंत मार्मिक और प्रेरणादायी विचार रखे। उन्होंने भविष्य के भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका को रेखांकित किया। तीन दिनों तक चले इस मंथन में 'भविष्य का भारत और हम' जैसे विषयों पर देश के प्रख्यात चिंतकों के बीच गहन वैचारिक विमर्श हुआ।

झाबुआ की युवा टोली का बौद्धिक प्रवास

झाबुआ से पहुँचे प्रतिनिधिमंडल के लिए यह अनुभव बौद्धिक और व्यक्तिगत दोनों स्तरों पर स्मरणीय रहा। यात्रा की थकान और प्रारंभिक चुनौतियों के बावजूद, युवाओं का जोश देखने लायक था। जनजातीय अध्ययन शाला के प्रोफेसर सखाराम जी मुजाल्दे का विशेष मार्गदर्शन युवाओं के लिए नई ऊर्जा का स्रोत बना। झाबुआ की टोली ने देश भर से आए विद्वानों से सीधा संवाद कर न केवल अपने ज्ञानार्जन में वृद्धि की, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों को और मजबूती से समझा। युवाओं का उत्साह, जिज्ञासा और सक्रिय सहभाग कार्यक्रम की आत्मा बनकर उभरी। यह आयोजन केवल सत्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चाय की चुस्कियों पर हुई चर्चाओं, सामूहिक भोज और आत्मीय मुलाकातों ने इसे एक पारिवारिक स्वरूप प्रदान किया। कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों ने प्रतिभागियों को न केवल बौद्धिक रूप से समृद्ध किया, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव भी पैदा किया। भोजन के दौरान आपसी चर्चा, स्मृति स्वरूप फोटो खिंचवाना और चाय पर हुई आत्मीय बातचीत ने पूरे आयोजन को पारिवारिक माहौल में बदल दिया। शुरुआत में तीन दिन लंबे लग रहे थे, लेकिन समय बीतने के साथ यह एहसास होने लगा कि यह आयोजन कुछ दिन और आगे बढ़ जाना चाहिए।

अविस्मरणीय और प्रेरणादायी अनुभव

बस की यात्रा के खट्टे-मीठे अनुभवों, शारीरिक थकान और वैचारिक उत्तेजना के बीच यह मंथन राष्ट्रबोध का एक वास्तविक उत्सव सिद्ध हुआ। नर्मदा साहित्य मंथन का यह पाँचवाँ वर्ष झाबुआ के युवाओं के लिए एक ऐसी धरोहर बनकर उभरा है, जिसे शब्दों में समेटना कठिन है। यह आयोजन युवाओं में अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति गौरव का भाव भरने में पूर्णतः सफल रहा।