हिन्दू सम्मेलन : संघ के शताब्दी वर्ष का भव्य आयोजन, सांस्कृतिक एकता और सामाजिक चेतना का ऐतिहासिक संदेश
झाबुआ। जिले के सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। झाबुआ जिले के कल्याणपुरा में आयोजित हुआ 'विशाल संस्कृति उत्सव और ऐतिहासिक हिन्दू संगम' क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक एकता का एक जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है। हिंदू सम्मेलन झाबुआ संघ ने अपने शताब्दी वर्ष (100 वर्ष) के अवसर पर एक भव्य और ऐतिहासिक आयोजन का सफल आयोजन किया। यह सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सौ वर्षों की सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और सनातन परंपराओं की जीवंत अभिव्यक्ति बनकर सामने आया। इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य आदिवासी बहुल झाबुआ क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को सनातन धर्म के साथ जोड़ना और 'हिन्दू संगम' के माध्यम से सामाजिक समरसता का संदेश देना था। कल्याणपुरा में जब इस उत्सव का आगाज हुआ, तब केसरिया ध्वजों और ढोल-धमाकों के साथ विशाल रैली निकाली गई। इसमें केवल कल्याणपुरा ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों पुरुष और महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। इस उत्सव में झाबुआ की पारंपरिक भीली संस्कृति और भजनों का अद्भुत संगम देखने को मिला। स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से इसे 'विशाल संस्कृति उत्सव' का रूप दिया। यह आयोजन झाबुआ के सामाजिक महासंघ और विभिन्न हिंदू संगठनों के बैनर तले संपन्न हुआ, जिसका लक्ष्य क्षेत्र के प्रत्येक वर्ग को राम मंदिर के उत्सव और सनातन परंपराओं से जोड़ना था।
100 वर्षों की यात्रा: सेवा, संस्कार और संगठन
हिंदू सम्मेलन झाबुआ संघ की स्थापना का उद्देश्य शुरू से ही समाज को एक सूत्र में बांधना, सनातन संस्कृति का संरक्षण करना और सामाजिक समरसता को मजबूत करना रहा है। पिछले 100 वर्षों में संघ ने शिक्षा, सेवा, संस्कृति और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। शताब्दी समारोह के दौरान इस ऐतिहासिक यात्रा को चित्र प्रदर्शनी, दस्तावेज़ों और वक्ताओं के माध्यम से विस्तार से प्रस्तुत किया गया। शताब्दी वर्ष के इस महासम्मेलन में झाबुआ जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में समाजजन, संत-महात्मा, बुद्धिजीवी, युवा और मातृशक्ति ने भाग लिया। पूरा आयोजन स्थल भगवा ध्वजों, सांस्कृतिक झांकियों और पारंपरिक सजावट से सुशोभित रहा, जिसने माहौल को अत्यंत प्रेरणादायक और आध्यात्मिक बना दिया। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार, दीप प्रज्वलन और पूजन के साथ हुई। इसके पश्चात रामायण, महाभारत और भारतीय संस्कृति से जुड़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। लोकनृत्य, भजन, शास्त्रीय संगीत और देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि संस्कृति ही समाज की आत्मा है।
वक्ताओं का संदेश: एकता, जागरूकता और राष्ट्रधर्म
सम्मेलन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि हिंदू समाज की सबसे बड़ी शक्ति उसकी एकता, संगठन और संस्कार हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे आधुनिकता के साथ-साथ अपनी संस्कृति और मूल्यों को भी आत्मसात करें। वक्ताओं ने सामाजिक कुरीतियों, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और सांस्कृतिक विघटन पर चिंता व्यक्त करते हुए समाज को जागरूक और संगठित रहने का संदेश दिया। शताब्दी वर्ष के इस आयोजन में युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी विशेष रूप से देखने को मिली। युवाओं ने स्वयंसेवक के रूप में व्यवस्था संभाली, वहीं मातृशक्ति ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामाजिक संदेशों को मजबूती से प्रस्तुत किया। इस अवसर पर संघ के पूर्व पदाधिकारियों, समाजसेवियों और उन व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने बीते दशकों में संघ को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही शताब्दी स्मृति ग्रंथ और स्मृति चिन्हों का भी विमोचन किया गया, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगे।
भविष्य की दिशा: अगली शताब्दी का संकल्प
सम्मेलन के समापन पर हिंदू सम्मेलन झाबुआ संघ ने अगली शताब्दी के लिए संकल्प लिया— समाज में शिक्षा का विस्तार, सांस्कृतिक जागरूकता, सेवा कार्यों को और सशक्त करना तथा युवाओं को नेतृत्व के लिए तैयार करना।


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