रील बनाने से रोका तो पति का घोंट दिया गला, यूट्यूब पर सीखी थी हत्या की तरकीब

Jhabua Wife Learns Murder on YouTube, Strangles Husband After Row Over Making Reels.

झाबुआ । सोशल मीडिया का जुनून जब हदें पार कर जाए, तो वह रिश्तों को भी बेरहमी से कुचल देता है। झाबुआ जिले से सामने आई एक सनसनीखेज वारदात इसी कड़वी हकीकत की गवाही देती है, जहाँ रील बनाने से रोकना एक पति की जिंदगी पर भारी पड़ गया। यह मामला सिर्फ हत्या का नहीं, बल्कि सोशल मीडिया की लत, टूटते रिश्तों और बढ़ते गुस्से का खौफनाक आईना है।  झाबुआ जिले के एक शांत गांव में घटी इस घटना ने मानवता और आधुनिक जीवनशैली पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ एक 'डिजिटल जुनून' ने उस पवित्र रिश्ते का अंत कर दिया, जिसे समाज में सात जन्मों का बंधन माना जाता है। 

Jhabua News- Jhabua Wife Learns Murder on YouTube, Strangles Husband After Row Over Making Reels- रील बनाने से रोका तो पति का घोंट दिया गला, यूट्यूब पर सीखी थी हत्या की तरकीब


मामला थांदला क्षेत्र के एक ग्रामीण अंचल का है, जहाँ एक नाबालिग पत्नी की दिनचर्या का बड़ा हिस्सा मोबाइल की स्क्रीन पर बीतता था। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर वीडियो (रील्स) बनाने का उसका शौक धीरे-धीरे एक सनक (Obsession) में बदल चुका था। पति कैलाश, जो अपनी सादगी और ग्रामीण परिवेश की मर्यादाओं को मानता था, उसे पत्नी का सार्वजनिक रूप से इस तरह प्रदर्शन करना रास नहीं आता था। घर में अक्सर मोबाइल और सोशल मीडिया को लेकर तकरार होती थी, लेकिन किसी ने सोचा भी नहीं था कि यह तकरार एक खौफनाक साजिश में बदल जाएगी। पति बार-बार उसे समझाता और रील बनाने से मना करता था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता रहता था। घटना वाली रात भी वही हुआ— रील बनाने को लेकर कहासुनी हुई, बहस बढ़ी और गुस्सा हिंसा में बदल गया।

साजिश और 'यूट्यूब' का सहारा

इस केस का सबसे चौंकाने वाला पहलू वह 'डिजिटल ट्रेनिंग' है, जो आरोपी ने हत्या से पहले ली। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि पति से विवाद के बाद पत्नी ने यूट्यूब पर यह सर्च किया कि "किसी का गला घोंटकर उसे मौत की नींद कैसे सुलाया जाए" और "गला दबाने के कितनी देर बाद इंसान मर जाता है"। आधुनिक तकनीक, जो ज्ञान बांटने के लिए थी, यहाँ एक अपराधी के लिए 'किलिंग ट्यूटोरियल' बन गई। घटना वाली रात, जब कैलाश गहरी नींद में सो रहा था, पत्नी ने अपने गुस्से को अंजाम देने का फैसला किया। उसने कमरे में रखा वह 'साफा' उठाया जो उनकी शादी के दिन कैलाश ने अपने सिर पर बांधा था। जो साफा मान-सम्मान और रक्षा का प्रतीक था, उसे ही कातिल पत्नी ने मौत का फंदा बना दिया। उसने सोते हुए पति के गले में साफे का रस्सा कस दिया। कैलाश को संभलने का मौका तक नहीं मिला और चंद मिनटों में उसकी सांसे थम गईं। सूत्रों के अनुसार, हत्या के बाद आरोपी ने खुद को सामान्य दिखाने के लिए फिर से श्रृंगार किया और पास में ही बज रहे डीजे की धुन पर नाचने तक की कोशिश की, ताकि किसी को शक न हो। अगले दिन उसने इसे एक सामान्य मौत का रूप देने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की नजरों से वह बच नहीं सकी।

पुलिस की सक्रियता: 24 घंटे में पर्दाफाश

झाबुआ एसपी के निर्देश पर टीम ने जब घटनास्थल का मुआयना किया, तो उन्हें गले पर बने निशानों ने चौंका दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने साफ कर दिया कि यह दम घुटने से हुई हत्या है। जब पुलिस ने पत्नी से कड़ाई से पूछताछ की, तो उसके बयानों के विरोधाभास ने उसे कटघरे में खड़ा कर दिया। आखिरकार, उसने अपना गुनाह कबूल किया और बताया कि कैसे 'रील' बनाने से रोकने की टीस ने उसे कातिल बना दिया। फिलहाल आरोपी नाबालिग होने के कारण बाल सुधार गृह भेजी जा सकती है, लेकिन अपराध की गंभीरता को देखते हुए कानून के कड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है।

मनोवैज्ञानिक विश्लेषण: एक गंभीर चेतावनी

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि यह घटना 'डिजिटल डोपामाइन' की कमी का परिणाम है। जब किसी व्यक्ति को सोशल मीडिया से मिलने वाली झूठी प्रशंसा में बाधा आती है, तो वह हिंसक हो सकता है। युवाओं में बढ़ती असहिष्णुता (Intolerance) और 'वर्चुअल पहचान' को 'वास्तविक पहचान' से ऊपर रखने की चाहत आज रिश्तों की बलि ले रही है। यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज के लिए गंभीर चेतावनी है। मनोविशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया की लत युवाओं में चिड़चिड़ापन, गुस्सा और असहिष्णुता बढ़ा रही है। ‘लाइक्स’, ‘व्यूज’ और ‘फॉलोअर्स’ की भूख रिश्तों से ज्यादा अहम होती जा रही है। झाबुआ की यह वारदात साफ बताती है कि जब आभासी दुनिया असली रिश्तों पर हावी हो जाए, तो अंजाम कितना खौफनाक हो सकता है।

झाबुआ पुलिस की साइबर सेल और फॉरेंसिक टीम ने इस मामले में जो खुलासे किए हैं, वे किसी भी सामान्य व्यक्ति को झकझोरने के लिए काफी हैं। तकनीक और अपराध के इस गठजोड़ ने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है।

यहाँ इस मामले की सांकेतिक साइबर जांच और साक्ष्यों का विवरण दिया गया है:

1. मोबाइल सर्च हिस्ट्री: अपराध की डिजिटल स्क्रिप्ट

जब पुलिस ने आरोपी पत्नी का स्मार्टफोन जब्त किया और उसकी 'सर्च हिस्ट्री' खंगाली, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। हत्या से कुछ घंटे पहले उसने ब्राउज़र पर कई संदिग्ध चीज़ें खोजी थीं:

  • "गला दबाने का सही तरीका"
  • "पोस्टमार्टम में मौत का कारण कैसे छिपाएं"
  • "नींद में इंसान को काबू कैसे करें" इन सर्च कीवर्ड्स ने साबित कर दिया कि यह आवेश में किया गया अपराध नहीं, बल्कि एक सोची-समझी सुनियोजित हत्या (Premeditated Murder) थी।

2. 'रील' पोस्टिंग और कमेंट्स की निगरानी

पुलिस ने पाया कि मृत पति कैलाश ने पत्नी की पिछली कई रील्स पर आपत्ति जताई थी। उसने कई बार कमेंट सेक्शन में भी विवाद किया था। पत्नी के सोशल मीडिया अकाउंट्स से यह पता चला कि वह अपनी 'वर्चुअल इमेज' को लेकर इतनी संवेदनशील थी कि पति के विरोध को अपनी आजादी और तरक्की में बाधा मान रही थी।

3. वारदात के बाद का 'डिजिटल फुटप्रिंट'

हैरानी की बात यह है कि हत्या के कुछ ही समय बाद, आरोपी पत्नी ने अपने मोबाइल से कुछ डेटा डिलीट करने की कोशिश की थी। उसने अपनी लोकेशन और कुछ चैट्स मिटा दिए थे, जिन्हें साइबर टीम ने 'डाटा रिकवरी' सॉफ्टवेयर की मदद से वापस हासिल कर लिया। ये चैट्स उसके किसी करीबी मित्र के साथ थे, जिसमें उसने पति के प्रति अपनी नफरत जाहिर की थी।

4. फॉरेंसिक साक्ष्य: साफे की जांच

फॉरेंसिक टीम ने उस 'शादी के साफे' का बारीकी से निरीक्षण किया। साफे के रेशों और उस पर मौजूद 'डीएनए' (DNA) नमूनों का मिलान पति के गले पर बने निशानों और पत्नी के हाथों के निशानों से किया गया। यह एक महत्वपूर्ण भौतिक साक्ष्य (Physical Evidence) बना जिसने आरोपी के झूठ को बेनकाब कर दिया।

पुलिस की चेतावनी 

झाबुआ पुलिस ने इस मामले के बाद सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग और उससे उत्पन्न होने वाले मानसिक विकारों के प्रति युवाओं को आगाह किया है। पुलिस का कहना है कि डिजिटल दुनिया की 'फेक' वाहवाही के चक्कर में लोग असल जिंदगी के 'इमोशनल सपोर्ट' यानी अपने परिवार को दुश्मन समझने लगे हैं।

झाबुआ पुलिस और जिला प्रशासन ने तकनीक के नकारात्मक प्रभावों को रोकने और समाज में जागरूकता लाने के लिए "साइबर सुरक्षा और सामाजिक सुधार" की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। कुछ विशेष प्रयास और अभियानों का ये है :

1. साइबर जागरूकता अभियान: 'सुरक्षित इंटरनेट' की ओर

  1. झाबुआ पुलिस ने स्कूलों और कॉलेजों में विशेष Cyber Awareness Programs शुरू किए हैं। इसका उद्देश्य युवाओं को सोशल मीडिया के 'मायाजाल' से बचाना है।
  2. अटकन चटकन 2.0: पुलिस द्वारा एक विशेष पत्रिका जारी की गई है, जो कॉमिक्स के माध्यम से युवाओं को रील बनाने की सनक, साइबर बुलिंग और डिजिटल अरेस्ट जैसे खतरों के प्रति जागरूक करती है।
  3. रक्षा सखी टीम: महिला पुलिस अधिकारियों की यह टीम विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं और छात्राओं के बीच जाकर उन्हें सोशल मीडिया पर अपनी निजता (Privacy) सुरक्षित रखने और डिजिटल लत (Addiction) से बचने के तरीके सिखा रही है।

2. 3D अभियान: 'डीजे, दारू और दापा' पर वार

  1. झाबुआ एसपी के नेतृत्व में प्रशासन ने '3D अभियान' (DJ, Daaru, Daapa) तेज कर दिया है।
  2. डिस्प्यूट मैनेजमेंट: रील बनाने जैसी छोटी बातों पर होने वाले बड़े झगड़ों को रोकने के लिए 'खाटला बैठकों' (पारंपरिक ग्रामीण बैठकें) का सहारा लिया जा रहा है।
  3. 3D वॉरियर्स: उन युवाओं को '3D वॉरियर' के रूप में सम्मानित किया जा रहा है जो शादियों में डीजे (शोर) और सोशल मीडिया के दिखावे के बजाय सादगी को बढ़ावा देते हैं।

3. 'संपूर्णता अभियान' और 'मिशन महिमा'

  1. संपूर्णता अभियान (28 जनवरी - 14 अप्रैल 2026): नीति आयोग के सहयोग से झाबुआ के आकांक्षी ब्लॉकों में यह अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत युवाओं के कौशल विकास और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, ताकि वे सोशल मीडिया पर समय बर्बाद करने के बजाय रचनात्मक कार्यों से जुड़ें।
  2. मिशन महिमा: इसके जरिए किशोरियों और महिलाओं को उनके अधिकारों और सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है, जिससे वे घरेलू हिंसा या मानसिक उत्पीड़न जैसी स्थितियों में चुप रहने के बजाय प्रशासन की मदद ले सकें।

4. काउंसलिंग और हेल्पलाइन सुविधाएँ

प्रशासन ने तकनीक के दुरुपयोग से टूटने वाले रिश्तों को बचाने के लिए विशेष परामर्श केंद्र (Counseling Centers) स्थापित किए हैं:

  1. बाल हेल्पलाइन (1098) और महिला हेल्पलाइन (1091): किसी भी प्रकार के घरेलू तनाव या सोशल मीडिया ब्लैकमेलिंग की स्थिति में यहाँ तुरंत मदद ली जा सकती है।
  2. अपराध निरोधक दस्ता (1090): यह नंबर विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए है जो सोशल मीडिया के कारण साइबर क्राइम का शिकार हो रही हैं।

 प्रशासन का संदेश

झाबुआ जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक का स्पष्ट संदेश है कि "प्रौद्योगिकी हमारे जीवन को सुगम बनाने के लिए है, इसे अपनों के खून से रंगने का जरिया न बनने दें।" प्रशासन अब तकनीकी साक्ष्यों (जैसे सर्च हिस्ट्री और कॉल रिकॉर्ड्स) के आधार पर ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित कर रहा है ताकि समाज में एक कड़ा उदाहरण पेश किया जा सके।

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