झाबुआ: तीन दिवसीय 'ब्रह्मज्ञान शिविर' का भव्य समापन, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक सुधार पर केंद्रित रहा आयोजन
झाबुआ। झाबुआ के अम्बा रिसॉर्ट में आयोजित तीन दिवसीय 'ब्रह्मज्ञान शिविर' का आज गरिमामय समापन हुआ। निजानन्द सेवा समिति, झाबुआ द्वारा श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ के तत्वावधान में आयोजित इस शिविर ने आध्यात्मिक गहराई और सामाजिक जागरूकता का एक अनूठा उदाहरण पेश किया।
आध्यात्मिक चिंतन और गहन विमर्श
इस त्रिदिवसीय समागम में श्री राजन स्वामी जी के सानिध्य में देश के ख्यातिलब्ध विद्वानों और आध्यात्मिक चिंतकों ने शिरकत की। डॉ. प्रवीण जी, आचार्य सूर्यप्रताप जी और विदुषी किरण माता जी सहित कई मनीषियों ने श्री प्राणनाथ जी की 'ब्रह्मवाणी' के गूढ़ रहस्यों पर प्रकाश डाला। चर्चा के केंद्र में मुख्य रूप से एक परब्रह्म की पहचान, भक्ति का वास्तविक मार्ग और ध्यान की महत्ता रही। आध्यात्मिक विषयों के साथ-साथ शिविर में वर्तमान सामाजिक चुनौतियों पर भी गंभीरता से विचार किया गया। विशेषज्ञों ने 'धर्म परिवर्तन की समस्या और उसके समाधान' तथा 'नारी शिक्षा की आवश्यकता' जैसे विषयों पर प्रभावी व्याख्यान दिए। कन्या गुरुकुल की छात्राओं—विद्या, चांदनी, कुलजम और नमु ने भी सक्रिय रूप से चर्चा में भाग लेकर आधुनिक समय में वैदिक शिक्षा की प्रासंगिकता को सिद्ध किया।
कार्यक्रम के सांस्कृतिक पक्ष को श्री प्राणनाथ ज्ञानपीठ के संगीताचार्य रणजीत जी और कन्या गुरुकुल के विद्यार्थियों ने अपनी सुमधुर प्रस्तुतियों से जीवंत कर दिया। ब्रह्मवाणी के गायन ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया, जिससे संपूर्ण परिसर भक्तिमय हो गया। समापन अवसर पर राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। पूर्व सांसद श्री गुमान सिंह जी डामोर, पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री कांतिलाल जी भूरिया, जनपद पंचायत सदस्य श्री रामपाल जी चौहान और रामामंडल अध्यक्ष श्री मुन सिंह जी परमार ने कार्यक्रम की सराहना की। निजानंद सेवा समिति के सदस्यों ने दाहोद, गुना, अलीराजपुर, झाबुआ, धार और रतलाम से पधारे 'सुंदर साथ' (श्रद्धालुओं) का आत्मीय स्वागत और सम्मान किया। आयोजन की सफलता का प्रमाण इस बात से मिलता है कि 150 से अधिक धर्मप्रेमी नागरिकों ने 'तारतम' ग्रहण कर निजानंद पंथ से अपना नाता जोड़ा और आत्म-कल्याण के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

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