शिवगंगा झाबुआ' का महाभियान: 4 फरवरी से 'ग्राम समृद्धि देव सेवा यात्रा' के जरिए पंच-देव की सेवा का संकल्प

Shivganga Jhabua's grand campaign: A pledge to serve the five deities through the 'Gram Samriddhi Dev Seva Yatra' starting February 4th.

'देव पूजा नहीं, देव सेवा से आएगी समृद्धि': झाबुआ में 'ग्राम समृद्धि देव सेवा यात्रा' का शंखनाद

Jhabua News- Shivganga Jhabua's grand campaign: A pledge to serve the five deities through the 'Gram Samriddhi Dev Seva Yatra' starting February 4th- शिवगंगा झाबुआ' का महाभियान: 4 फरवरी से 'ग्राम समृद्धि देव सेवा यात्रा' के जरिए पंच-देव की सेवा का संकल्प
झाबुआ। झाबुआ के सामाजिक और पर्यावरणीय परिदृश्य को बदलने वाली संस्था शिवगंगा के तत्वावधान में आगामी 4 से 10 फरवरी 2026 तक एक ऐतिहासिक अभियान 'ग्राम समृद्धि देव सेवा यात्रा' का आयोजन होने जा रहा है। पद्मश्री महेश शर्मा के मार्गदर्शन में संचालित 'शिवगंगा' पिछले दो दशकों से जनजाति समाज के पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विकास का आधार बनाने में जुटी है, और यह यात्रा उसी दिशा में एक बड़ा कदम है।  जनजाति समाज की समृद्ध परंपराओं को आधुनिक विकास के साथ जोड़ने वाली यह यात्रा 'पंच-देव' के संरक्षण और संवर्धन के संकल्प पर आधारित है।  सेवा से समृद्धि की ओर शिवगंगा संस्था का मानना है कि जनजाति समाज कभी भी 'बेचारा' नहीं रहा, बल्कि वह अपनी संस्कृति और पुरुषार्थ से समृद्ध रहा है। संस्था ने समाज में 'परमार्थ' (दूसरों के लिए कार्य करना) के भाव को जगाया है। इसी विजन के तहत इस यात्रा में पंच-देव की सेवा का आह्वान किया गया है:  
  •  जल संवर्धन: शिवगंगा ने अब तक 'हलमा' के माध्यम से हजारों जल संरचनाओं का निर्माण किया है। 
  •  जंगल (मातावन): गाँवों में पवित्र उपवन (मातावन) विकसित कर हरियाली लौटाना। 
  •  ज़मीन, जानवर और जन: जैविक खेती, उन्नत पशुपालन और स्वस्थ, शिक्षित समाज का निर्माण।
हलमा: केवल श्रमदान नहीं, एक आध्यात्मिक कर्तव्य इस यात्रा का मुख्य आकर्षण 
'हलमा' परंपरा का पुनर्जीवन है। भील संस्कृति की यह वह अनूठी परंपरा है जिसमें पूरा गाँव किसी एक व्यक्ति या समाज के सामूहिक संकट (जैसे जल संकट) को दूर करने के लिए निस्वार्थ भाव से श्रमदान करता है। शिवगंगा ने इस परंपरा को 'शिवजी का हलमा' नाम दिया है, जहाँ हजारों ग्रामीण अपने हाथों में गैती और फावड़ा लेकर 'धरती की प्यास' बुझाने के लिए उतरते हैं। 
 गाँव-गाँव में बैठकों का दौर 
अक्षय विकास शिवगंगा के प्रशिक्षित युवा कार्यकर्ता (जिन्हें 'ग्राम इंजीनियर' और 'सामाजिक नेतृत्वकर्ता' कहा जाता है) इस यात्रा के दौरान गाँवों में मासिक ग्राम समृद्धि बैठकों की नींव रखेंगे। इन बैठकों का उद्देश्य गाँवों को सरकारी सहायता पर निर्भर बनाने के बजाय स्वावलंबी बनाना है।

पंच-देव: जल, जंगल, ज़मीन, जानवर और जन

भील जनजाति की संस्कृति में केवल देवताओं की पूजा ही नहीं, बल्कि प्रकृति के विभिन्न स्वरूपों की सेवा को सर्वोपरि माना गया है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य जल, जंगल, ज़मीन, जानवर और जन (पंच-देव) की रक्षा करना है। जनजातीय दर्शन के अनुसार, जब समाज इन पांच तत्वों की सेवा और संरक्षण करेगा, तभी गाँवों में वास्तविक और अक्षय समृद्धि का आगमन होगा।

सामूहिक श्रमदान (हलमा) और ग्राम बैठकों का आगाज़

इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान हजारों ग्रामवासी गाँव-गाँव में एकजुट होकर 'हलमा' (पारंपरिक सामूहिक श्रमदान) की परंपरा को जीवंत करेंगे। इसके साथ ही, गाँवों के सतत विकास और स्वावलंबन के लिए 'मासिक ग्राम समृद्धि बैठकों' का भी विधिवत शुभारंभ किया जाएगा। ये बैठकें भविष्य में ग्रामीण विकास की योजनाओं और समस्याओं के समाधान का प्रमुख केंद्र बनेंगी। यात्रा के दौरान हजारों ग्रामीण अपनी गौरवशाली 'हलमा' (सामूहिक श्रमदान) परंपरा को जीवंत करेंगे और सतत विकास हेतु 'मासिक ग्राम समृद्धि बैठकों' का शुभारंभ करेंगे। 

सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का आह्वान

यह यात्रा केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जनजाति समाज की उस जीवन पद्धति को समझने का अवसर है जो प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर चलने की सीख देती है। आयोजकों ने जिले के समस्त नागरिकों से अपने मित्रों और परिजनों के साथ इस यात्रा में सम्मिलित होने की अपील की है, ताकि लोग जनजाति संस्कृति से उपजी 'अक्षय विकास' की राह को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव कर सकें।

विकास का नया मॉडल

झाबुआ का यह अभियान आज के दौर में 'इको-फ्रेंडली' और 'सस्टेनेबल' विकास का एक सशक्त भारतीय मॉडल पेश कर रहा है। जहाँ दुनिया जलवायु परिवर्तन से जूझ रही है, वहीं झाबुआ के ग्रामीण 'देव सेवा' के माध्यम से प्रकृति और मनुष्य के अटूट रिश्ते को पुनः स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। यह आयोजन आधुनिक 'सस्टेनेबल' विकास का एक सशक्त भारतीय मॉडल पेश करता है, जो प्रकृति के संवर्धन को ही प्रगति का आधार मानता है। आयोजकों ने समस्त नागरिकों से इस ऐतिहासिक यात्रा का हिस्सा बनने का आह्वान किया है, ताकि जनजाति समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारिस्थितिक संतुलन के मार्ग को प्रत्यक्ष रूप से समझा जा सके।

शिवगंगा की अपील: 
जुड़ें इस ऐतिहासिक यात्रा से शिवगंगा संस्था ने जिले के समस्त नागरिकों और प्रबुद्ध जनों से आह्वान किया है कि वे इस यात्रा में सम्मिलित होकर जनजाति समाज की गौरवशाली जीवन पद्धति को समझें। संस्था का मानना है कि 'देव पूजा' मंदिरों तक सीमित न रहे, बल्कि जब हम प्रकृति के इन पांच देवों (जल, जंगल, ज़मीन, जानवर, जन) की सेवा करेंगे, तभी झाबुआ और भारत का भविष्य सुरक्षित होगा।
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