झाबुआ में बड़ा हादसा टला: बेकाबू ट्रॉला बिजली के पोल से टकराया, भारी वाहनों की एंट्री पर फिर उठे सवाल
- प्रतिबंध के बावजूद शहर में घुसा ट्रॉला, बिजली का खंभा तोड़ा, प्रशासन की निगरानी पर सवाल
- सज्जन रोड पर तेज रफ्तार ट्रॉले का कहर, बिजली का पोल क्षतिग्रस्त, बाल-बाल बची लोगों की जान
- झाबुआ की यातायात व्यवस्था फिर कटघरे में, भारी वाहन ने मचाई अफरा-तफरी
झाबुआ। शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रशासन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद नियमों की अनदेखी लगातार जारी है। इसका ताजा उदाहरण बुधवार सुबह उस समय देखने को मिला, जब सज्जन रोड पर एक तेज रफ्तार ट्रॉला अनियंत्रित होकर सड़क किनारे स्थित डिवाइडर और बिजली के पोल से जा टकराया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बिजली का खंभा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और आसपास के क्षेत्र में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। गनीमत यह रही कि दुर्घटना के समय ट्रॉले की चपेट में कोई राहगीर, दोपहिया वाहन या अन्य वाहन नहीं आया। यदि उस समय सड़क पर सामान्य से अधिक भीड़ होती, तो यह घटना एक बड़े सड़क हादसे का रूप ले सकती थी।
चश्मदीदों ने बताया कैसे हुआ हादसा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ट्रॉला काफी तेज गति से शहर की ओर आ रहा था। सज्जन रोड पहुंचते ही चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा और ट्रॉला सीधे सड़क किनारे बने डिवाइडर तथा बिजली के पोल से जा टकराया। जोरदार टक्कर की आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोग तुरंत मौके की ओर दौड़े। हादसे के बाद कुछ समय तक यातायात भी प्रभावित रहा। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को घटना की सूचना दी। घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और कई लोग इस बात पर चर्चा करते दिखाई दिए कि आखिर प्रतिबंध के बावजूद भारी वाहन शहर के भीतर कैसे पहुंच गया।
बिजली के पोल को हुआ भारी नुकसान
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि सड़क किनारे लगा बिजली का पोल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इससे आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पोल किसी राहगीर या वाहन पर गिर जाता तो गंभीर जनहानि हो सकती थी। घटना के बाद संबंधित विभाग द्वारा क्षतिग्रस्त पोल का निरीक्षण किया गया ताकि विद्युत आपूर्ति और सुरक्षा व्यवस्था को जल्द सामान्य किया जा सके।
चालक वाहन छोड़कर फरार
स्थानीय लोगों के अनुसार दुर्घटना के बाद ट्रॉला चालक मौके से फरार हो गया। इसके बाद पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और वाहन को अपने कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वाहन के पंजीयन और अन्य दस्तावेजों के आधार पर चालक की पहचान की जा रही है। मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी और दुर्घटना के वास्तविक कारणों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस ने संभाली यातायात व्यवस्था
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और सबसे पहले सड़क पर प्रभावित यातायात को सामान्य कराया। दुर्घटनाग्रस्त ट्रॉले को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई ताकि अन्य वाहनों के आवागमन में किसी प्रकार की बाधा न आए। पुलिस ने आसपास मौजूद लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की भी अपील की, क्योंकि बिजली के पोल के क्षतिग्रस्त होने के कारण सुरक्षा संबंधी खतरा बना हुआ था।
प्रतिबंध के बावजूद शहर में कैसे पहुंचा भारी वाहन?
इस दुर्घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर पहले से प्रतिबंध लागू है, तब यह ट्रॉला शहर के मुख्य मार्ग तक कैसे पहुंच गया? स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन समय-समय पर भारी वाहनों की आवाजाही रोकने के दावे तो करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर निगरानी उतनी प्रभावी दिखाई नहीं देती। यदि प्रवेश बिंदुओं पर नियमित जांच, बैरिकेडिंग और निगरानी की व्यवस्था सख्ती से लागू की जाए तो इस प्रकार की घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।
प्रशासन ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि शहर में प्रतिबंधित समय या क्षेत्र में प्रवेश करने वाले भारी वाहनों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो और शहर की यातायात व्यवस्था अधिक सुरक्षित बनाई जा सके।
जिम्मेदारी किसकी?
यह हादसा केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था और प्रशासनिक समन्वय पर भी कई सवाल खड़े करता है।
- नगर पालिका/नगर परिषद- की जिम्मेदारी शहर के अंदरूनी मार्गों, डिवाइडर, स्ट्रीट फर्नीचर तथा सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े ढांचों के रखरखाव की होती है।
- लोक निर्माण विभाग (PWD)- सड़क निर्माण, मरम्मत और सुरक्षा मानकों को बनाए रखने के लिए उत्तरदायी माना जाता है।
- यातायात पुलिस एवं जिला प्रशासन- का दायित्व है कि शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर लागू प्रतिबंधों का प्रभावी ढंग से पालन कराया जाए, प्रवेश बिंदुओं पर नियमित निगरानी रखी जाए तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
स्थानीय लोगों का मानना है कि इन सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय से ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।
स्थानीय नागरिकों में नाराजगी
घटना के बाद आसपास के रहवासियों ने प्रशासन से मांग की कि शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर केवल कागजी प्रतिबंध लगाने के बजाय उसका सख्ती से पालन कराया जाए। लोगों का कहना है कि स्कूल, बाजार और घनी आबादी वाले क्षेत्रों से होकर गुजरने वाले भारी वाहन हमेशा दुर्घटना का खतरा पैदा करते हैं। रहवासियों ने यह भी सुझाव दिया कि शहर के बाहर बने बायपास मार्ग का उपयोग सभी भारी वाहनों के लिए अनिवार्य किया जाए और प्रतिबंधित मार्गों पर प्रवेश करने वाले वाहनों के खिलाफ नियमित चालानी कार्रवाई की जाए।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते शहरी यातायात के बीच भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही गंभीर खतरा बन सकती है। ऐसे में केवल दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय पूर्व-नियोजित यातायात प्रबंधन, सीसीटीवी निगरानी, स्वचालित बैरियर, नियमित चेकिंग अभियान और प्रभावी प्रवर्तन व्यवस्था आवश्यक है। बुधवार की यह घटना भले ही बिना जनहानि के समाप्त हो गई हो, लेकिन इसने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि यातायात नियमों का कड़ाई से पालन नहीं कराया गया तो भविष्य में इससे भी बड़ा हादसा हो सकता है। शहरवासियों को उम्मीद है कि प्रशासन इस घटना से सबक लेते हुए भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करेगा और सार्वजनिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा।

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