NEET-UG 2026 परिणाम विवाद: झाबुआ के छात्र के अंकों में 241 नंबर की कथित गड़बड़ी, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और एनटीए से मांगा जवाब

NEET UG 2026 Result: Madhya Pradesh High Court examines a Jhabua student's petition over an alleged 241-mark discrepancy in the NTA result.

305 अंक मिलने का दावा, अंतिम परिणाम में केवल 64 अंक; मेडिकल प्रवेश पर संकट, हाईकोर्ट की निगरानी में पूरा मामला

इंदौर/झाबुआ। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG 2026) के परिणामों में कथित गंभीर अनियमितता का मामला अब मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की चौखट तक पहुंच गया है। झाबुआ जिले के एक छात्र के परीक्षा परिणाम में 241 अंकों के भारी अंतर का आरोप लगाते हुए दायर रिट याचिका पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने इसे सुनवाई के योग्य मानते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। यह मामला केवल एक छात्र के परिणाम तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि यदि याचिका में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली, डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया और ऑनलाइन डेटा प्रोसेसिंग की पारदर्शिता पर भी महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े कर सकता है।

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झाबुआ के छात्र ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

यह रिट याचिका झाबुआ जिले के निवासी लोकेन्द्र सिंह खाड़िया की ओर से दायर की गई है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा गया, जिसे न्यायालय ने स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई निर्धारित की। अब पूरे मामले पर सभी पक्षों के जवाब और रिकॉर्ड के आधार पर विस्तृत सुनवाई होगी।

241 अंकों का अंतर कैसे बना विवाद का कारण?

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिनव पी. धनोदकर ने न्यायालय को बताया कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा उपलब्ध कराई गई आधिकारिक ओएमआर (OMR) शीट तथा उत्तर कुंजी (Answer Key) के आधार पर छात्र के कुल 305 अंक बनते हैं।

याचिका के अनुसार अंक इस प्रकार बताए गए हैं—

  1. भौतिकी (Physics): 104 अंक
  2. रसायन विज्ञान (Chemistry): 125 अंक
  3. जीव विज्ञान (Biology): 76 अंक

इन तीनों विषयों के आधार पर कुल 305 अंक प्राप्त होते हैं। लेकिन जब 16 जुलाई 2026 को एनटीए ने अंतिम परिणाम घोषित किया तो छात्र को मात्र 64 अंक प्रदान किए गए। यानी ओएमआर शीट और अंतिम परिणाम के बीच 241 अंकों का अंतर सामने आया, जिसने छात्र और उसके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।

दो वर्ष की मेहनत पर खड़े हुए सवाल

याचिका में उल्लेख किया गया है कि लोकेन्द्र सिंह खाड़िया ने वर्ष 2024 में 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद इंदौर में रहकर लगभग दो वर्षों तक मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी की। बताया गया कि पहले निर्धारित परीक्षा निरस्त होने के बाद छात्र ने 21 जून को आयोजित पुनर्परीक्षा में भाग लिया था। परिवार और छात्र को उम्मीद थी कि बेहतर प्रदर्शन के आधार पर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश का अवसर मिलेगा, लेकिन घोषित परिणाम ने पूरी स्थिति बदल दी। याचिका के अनुसार यदि वास्तविक अंक 305 हैं तो छात्र मेडिकल काउंसलिंग में प्रतिस्पर्धा कर सकता है, जबकि 64 अंकों के परिणाम के कारण उसका पूरा भविष्य प्रभावित हो गया है।

ऑनलाइन ओएमआर पोर्टल पर तकनीकी गड़बड़ी का आरोप

याचिका में एनटीए के ऑनलाइन पोर्टल पर गंभीर तकनीकी त्रुटि होने का भी दावा किया गया है। अदालत को बताया गया कि 14 जुलाई को जब एनटीए ने अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट ऑनलाइन उपलब्ध कराई, तब छात्र ने पहली बार अपने खाते में लॉगिन किया। उस समय पोर्टल पर दिखाई गई ओएमआर शीट में भौतिकी और रसायन विज्ञान के लगभग सभी उत्तर रिक्त (Blank) दिखाई दे रहे थे। इससे छात्र को आशंका हुई कि कहीं तकनीकी समस्या तो नहीं है। कुछ समय बाद जब छात्र ने दोबारा लॉगिन किया तो उसी पोर्टल पर दूसरी ओएमआर शीट दिखाई दी, जिसमें उसके उत्तर स्पष्ट रूप से दर्ज थे। याचिका में दावा किया गया है कि इसी दूसरी ओएमआर शीट का आधिकारिक उत्तर कुंजी से मिलान करने पर कुल 305 अंक प्राप्त हो रहे थे।

डेटा प्रोसेसिंग और मूल्यांकन पर उठे प्रश्न

याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि आधिकारिक ओएमआर शीट और उत्तर कुंजी के अनुसार 305 अंक बन रहे हैं, तो अंतिम परिणाम में केवल 64 अंक कैसे दर्ज हुए? याचिका में आशंका व्यक्त की गई है कि कहीं ओएमआर डेटा प्रोसेसिंग, डिजिटल मूल्यांकन, स्कोर कम्पाइलेशन अथवा परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया में कोई गंभीर तकनीकी या प्रशासनिक त्रुटि तो नहीं हुई। इसी कारण छात्र ने न्यायालय से संपूर्ण प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।

एनटीए को भेजी शिकायत, नहीं मिली राहत

याचिका के अनुसार परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद छात्र ने ई-मेल के माध्यम से एनटीए को पूरी जानकारी भेजकर शिकायत दर्ज कराई थी। उसने संबंधित दस्तावेजों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर अपने परिणाम की पुनः जांच करने का अनुरोध भी किया, लेकिन आरोप है कि समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करते हुए छात्र ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की।

न्यायालय से क्या मांग की गई है?

  • याचिका में उच्च न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि एनटीए को निर्देश दिए जाएं कि—
  •  छात्र की मूल ओएमआर शीट का स्वतंत्र सत्यापन कराया जाए।
  • उत्तर कुंजी के आधार पर पुनः मूल्यांकन किया जाए।
  • अंक गणना और परिणाम तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की जांच की जाए।
  • यदि त्रुटि सिद्ध होती है तो छात्र का परिणाम तत्काल संशोधित किया जाए।
  • संशोधित परिणाम के आधार पर उसे मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में उचित अवसर उपलब्ध कराया जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा मानी जाने वाली NEET-UG में करोड़ों अभ्यर्थी अपने भविष्य की उम्मीद लेकर शामिल होते हैं। ऐसे में यदि किसी अभ्यर्थी के परिणाम में तकनीकी या डेटा संबंधी त्रुटि सामने आती है तो उसका सीधा प्रभाव उसके करियर पर पड़ सकता है। यही कारण है कि यह मामला केवल एक छात्र का व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि डिजिटल परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व से भी जुड़ा माना जा रहा है।

28 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

मामले की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को जवाब प्रस्तुत करने का अवसर देते हुए अगली सुनवाई 28 जुलाई निर्धारित की है। अब सभी की निगाहें अदालत की अगली कार्यवाही पर टिकी हैं। यदि याचिका में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है तो यह मामला देशभर में आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं की मूल्यांकन प्रणाली और परीक्षा प्रबंधन को लेकर एक महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल भी बन सकता है।

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