झाबुआ से राष्ट्र निर्माण का संकल्प : "हमारा विद्यालय, हमारा स्वाभिमान" अभियान की गूंज

1 सितंबर को जिले के सभी विद्यालयों में शिक्षक-विद्यार्थी शपथ लेंगे।

मंत्री निर्मला भूरिया ने किया संकल्प पत्र का लोकार्पण, 1 सितंबर को हर विद्यालय बनेगा प्रेरणा केंद्र

 झाबुआ। जिले ने शिक्षा और संस्कारों को नई दिशा देने की ठानी है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शिक्षक महासंघ, नई दिल्ली से संबद्ध मध्य प्रदेश शिक्षक संघ, जिला झाबुआ ने एक ऐतिहासिक पहल की है। झाबुआ सर्किट हाउस में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान, मध्य प्रदेश शासन की महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने “हमारा विद्यालय, हमारा स्वाभिमान संकल्प पत्र” का लोकार्पण किया। यह केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि शिक्षा जगत को एकजुट करने वाला वह संकल्प है, जो आने वाले समय में विद्यालयों की दिशा और दशा बदलने का आधार बनेगा।

1 सितंबर को हर विद्यालय बनेगा संकल्प स्थल

कार्यक्रम के अंतर्गत तय हुआ कि आगामी 1 सितंबर 2025 को झाबुआ जिले के सभी विद्यालयों में यह संकल्प पत्र पढ़ा जाएगा और शिक्षकों एवं छात्रों को शपथ दिलाई जाएगी।

संकल्प पत्र की प्रमुख बातें –

  1. विद्यालय को स्वच्छ, अनुशासित, हरित और प्रेरणादायी बनाए रखना।
  2. विद्यालय की संपत्ति और समय को राष्ट्र की धरोहर मानते हुए उसका विवेकपूर्ण उपयोग।
  3. ऐसा वातावरण तैयार करना जहां कोई भेदभाव न हो और सभी विद्यार्थी व शिक्षक समान भाव से सीखने-सिखाने के पथ पर आगे बढ़ें।
  4. शिक्षा को केवल ज्ञान का साधन न मानकर, उसे चरित्र निर्माण, आत्मविकास और समाज सेवा का माध्यम बनाना।
  5. विद्यालय को केवल एक संस्था नहीं, बल्कि संस्कार, सेवा और समर्पण का तीर्थ मानकर उसके गौरव को बढ़ाना।
  6. यह पहल न सिर्फ विद्यार्थियों को नई दिशा देगी, बल्कि शिक्षकों को भी आत्मबोध कराएगी कि उनकी भूमिका केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण तक विस्तृत है।
Jhabua News- Cabinet Minister Nirmala Bhuria released the Madhya Pradesh Teachers' Association's resolution letter 'Our School Ours, Self-Respect - मंत्री निर्मला भूरिया ने किया संकल्प पत्र का लोकार्पण, 1 सितंबर को हर विद्यालय बनेगा प्रेरणा केंद्रा

मंत्री निर्मला भूरिया का संदेश

संकल्प पत्र का विमोचन करते हुए मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा – “विद्यालय केवल पढ़ाई का स्थान नहीं है, यह वह भूमि है जहां से राष्ट्र निर्माण की नींव रखी जाती है। हमारे बच्चे और शिक्षक जब इस संकल्प को आत्मसात करेंगे, तब शिक्षा का वास्तविक अर्थ पूरा होगा।” उन्होंने यह भी घोषणा की कि 1 सितंबर को वह स्वयं किसी विद्यालय में उपस्थित रहकर बच्चों और शिक्षकों के साथ यह संकल्प लेंगी। उनका कहना था कि यह अभियान शिक्षा के साथ-साथ बच्चों में संस्कार और जिम्मेदारी का भाव जागृत करेगा। 

संकल्प पत्र का क्रियान्वयन

संकल्प पत्र को लागू करने के लिए तय किया गया है कि प्रत्येक विद्यालय का प्रभारी इस पत्रक को विद्यालय की बाहरी दीवार पर चिपकाएगा।

  • मध्य प्रदेश शिक्षक संघ यह पत्रक सभी विद्यालयों तक पहुँचाएगा।
  • यदि किसी विद्यालय में यह पत्रक प्रत्यक्ष रूप से नहीं पहुँच पाता है, तो शिक्षक संघ की व्यवस्था होगी कि व्हाट्सएप के माध्यम से उसे वहाँ उपलब्ध कराया जाए।
  • विद्यालय के प्रधानाध्यापक और शिक्षक इस प्रक्रिया को गंभीरता से लागू करेंगे।

व्यापक स्तर पर भागीदारी

इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के झाबुआ, थांदला, पेटलावद, मेघनगर, रामा और राणापुर के सभी पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि यह संकल्प अभियान आने वाले वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में एक “आदर्श मॉडल” बनेगा।

क्यों है यह संकल्प पत्र ऐतिहासिक?

झाबुआ का यह कदम केवल स्थानीय पहल नहीं है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस प्रकार का संकल्प देशभर में शिक्षा के क्षेत्र को एक नई पहचान दे सकता है। कारण –

  1. विद्यालयों की सकारात्मक छवि और गौरव बढ़ेगा।
  2. विद्यार्थी संस्कार, अनुशासन और जिम्मेदारी को अपनी आदत बनाएंगे।
  3. शिक्षक शिक्षा को समर्पण और सेवा से जोड़ पाएंगे।
  4. समाज में विद्यालय एक आदर्श तीर्थ की तरह देखा जाएगा।
  5. यह पहल अन्य जिलों और राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी।

शिक्षा से राष्ट्र निर्माण का मार्ग

आज जब शिक्षा को अक्सर केवल अंकों और डिग्रियों से तौला जाता है, तब झाबुआ की यह पहल यह याद दिलाती है कि शिक्षा का मूल उद्देश्य है –

  • चरित्र निर्माण
  • समानता और सहभावना
  • देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी

यदि हर बच्चा इस भावना के साथ बड़ा होगा कि उसका विद्यालय उसका “तीर्थ” है और उसका “गौरव”, तो भविष्य में वह न सिर्फ अपने परिवार का, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र का सम्मान बढ़ाएगा। झाबुआ का यह अभियान केवल संकल्प का कागज़ नहीं, बल्कि एक सामूहिक चेतना का उदय है। शिक्षक और विद्यार्थी जब एक साथ अपने विद्यालय की पवित्रता, अनुशासन और गौरव की रक्षा का वचन देंगे, तब निश्चित ही यह आंदोलन आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देगा। झाबुआ से शुरू हुई यह पहल संभव है कि एक दिन पूरे भारत में शिक्षा को फिर से “संस्कार और स्वाभिमान” का पर्याय बना दे।

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